Tuesday, August 23, 2011

5TH Pillar Corruption Killer: " AB - PATA - CHALA - KYON NAHI PRINT HOTA NOTON P...

5TH Pillar Corruption Killer: " AB - PATA - CHALA - KYON NAHI PRINT HOTA NOTON P...: " अन्ना " और " कृष्णा " के रस में डूबे दोस्तों ! ! जय -जय श्री राधे कृषण ..! !कुछ समय पहले कई देश भगतों के भगतों ने ये आवाज़ लगायी थी कि महा...

Sunday, August 21, 2011

Vedic Astrology: Why do we wear marks (tilak, pottu and the like) o...

Vedic Astrology: Why do we wear marks (tilak, pottu and the like) o...: The tilak or pottu invokes a feeling of sanctity in the wearer and others. It is recognized as a religious mark. Its form and colour vary ...

Saturday, July 30, 2011

Gurdeep Grewall: A Live Musical Night 07/23/2011

Gurdeep Grewall: A Live Musical Night 07/23/2011: "A Live Musical Night of Urdu and Punjabi Geets and Ghazals of Pakistan was a success!  Many thanks to everyone who attended!  A special th..."

Monday, July 25, 2011

Gurdeep Grewall: Welcome to my official Blog!

Gurdeep Grewall: Welcome to my official Blog!: "Here you will find all of the information about my work. You will find pictures and videos from various public and private shows that I hav..."

Friday, July 22, 2011

Monday, July 18, 2011

Thursday, July 14, 2011

Monday, July 4, 2011

Posted by Picasa

आल इंडिया हिन्दू पर्सनल ला बोर्ड: अण्णा कि गेंग मे बॉलीवुड था साथ लेकिन अब.............

आल इंडिया हिन्दू पर्सनल ला बोर्ड: अण्णा कि गेंग मे बॉलीवुड था साथ लेकिन अब.............: "अण्णा कि गेंग मे बॉलीवुड था साथ लेकिन अब है बॉलीवुड है बाबा से दूर ! क्यों जानिए ! श्रेष्‍ठ भारत प्रस्‍तुतिः डॉ0 संतोष राय पिछली बार जब अण्..."

Sunday, June 26, 2011

Mere Zanib Ek Arz Hai Meri - writer _ Kamlesh Chauhan@2011.All Rights Reserved

मेरी जानिब इक  अर्ज़ है मेरी 
लेखक : कमलेश चौहान ( गौरी)

मैने माना की तेरी मुहब्बत ने  बनाया दर्रिया-ए नापैदाकरा मुझे 
यह पाव में रस्मो रिवाजो की कड़िया दूर जाने को मजबूर  करे मुझे

गर गर्म हवाए सितम की उड़ा के  किसी दूर सागर में फैंक  आये मुझे
आस न  छोड़ देना , भूल न जाना  यु   रास्ते की  भूल समझ कर  मुझे 

पूछ रास्ता अम्बर से  मेरे जानिब मेरे जिगर तुम हमें अपने  पास बुला लेना
हम गिर जाये राह में ठोकर खाकर , दे आसरा अपने कंधो पे हमें उठा लेना
हम रूठ भी जाये  अगर बार बार तुमसे  , तुम प्यार से हमें यु मना लेना
बिखर जाये अगर हमारे खुश्क  उदास गेसू , अपने हाथो से इन्हे संवार देना  
 हो कर बेज़ार इस   दुनिया से तेरे आगे,  रो पड़े बेमतलब  बात बात पे  हम
देकर अपनी मजबूत बाज़ुवो का सहारा , तुम हमें अपने सीने से  लगा लेना
एहसास है दिल को खुबसूरत तो हम  नहीं   , काबिल भी नहीं रहे  हम तेरे 
एक अर्ज़ है बस मेरी इतनी . मेरे यह हसीं खवाब तुम अपनी आँखों में बसा लेना 

Please this is my humble request use your own creativity. Nothing should be manipulated, exploited from this poetry in any forms of sentiments, Views from above Poetry. Copy Right@"Castle In The Sky Upcoming Novel"Kamlesh Chauhan Gauri
 
दर्रिया -ए नापैदाकरा =  अथाह सागर
 


 
 



 

Sunday, June 19, 2011

Bewazah Teri Gali Mein: Lekhak --Kamlesh Chauhan @June 2011


बेवज़ह तेरी गली में


लेखक - कमलेश चौहान

Copy Right@Kamlesh Chauhan


कहाँ से लायू किताबे ज़ीस्त , कौन लिखेंगा तेरा नाम ?

मेरा हाथो की लकीरों में

अंधेरो से गिला काया करू , उदय होते ही उजले सूरज के

दोनों हाथ जल गए थे सवेरे में

दिल की दहलीज़ पर सदियों से जो सुबह की कायनात सी

खामिशी छाई थी

ले जाकर किनारे पे साहिल ने चुपके से सागर में

खुद ही नाव डुबोई थी

चले ले कर रहगुजर में मीठे खवाबो का काफिला

दो अजनबी इक साथ

बिन सोचे, बेख्याल , मदहोश, बेकाबू हिसारो में कैद

मासूम ज़ज्बात

याद आये वोह रविंशे-गर्दोबाद तेज़ हवा के झोंके

मेरे कदम बेवजह तेरी गली में ले गए

न जाने क्या हुवा यह तो है मेरी रूह के पहचाने दरो दिवार

बेखुद नासुबरी आ गए

शौके -बे -माया ने तुझे भी शायद जा नींद से जगाया होगा

सुनी जो शबेतार में कदम की आहट

मेरी आँखों में थी तेरी रोशनी शायद चाँद निकल आया होगा

हलके हलके बदने लगी दिलो की चाहत

तुम्हारी वफ़ा को करू मै सजदे , तकरार पर भी रोकते हो

रोक लेते हो रास्ता मेरा

भीगी पलकों को यु चूम कर मेरी मस्ती में मुस्करा देते हो

चुमते है लब मेरे नाम तेरा

आस दिलाते हो उन पालो की तुम और मै का सरूर होगा

सर्द रातो की लम्बी रातो में खामोश चाँद तारे होंगे


बस कर मेरे दिल की धारको में मेरा राज़ जाने वाले

तुझे हासिल करना

दो जहानों के फासलों में दहकते ज़ज्बातो को जगाने वाले

दिन रात तेरे ख्वाब देखना

मेरे मुकदर में लिखा अदब का लिखा कहर नहीं बदल सकता

जो बिगड़ जाते है नसीबे तखली कंकारो के हाथो

वोह नसीब गुल्बदानो से संवारा नहीं जा सकता

सुन गौर से र्हर्बने शौक यह भरम की खावाबे राह्गुजर है

जिनकी तकदीरो में शिकस्ते मुसाफत

उनका वक़त बदले भी नहीं बदल सकता

बेहतर है इसे इक रात का खोया खवाब समझकर सुबह होते भूल जाना

रहे तेरी दुनिया आबाद यारब , मेरे हर गुनाह को नसीब का भूल समझना

All Rights Reserved with Kamlesh ChauhanGauri. Nothing should be manipulated or exploited for any use of words, Ideas and sentiments.

















           

                  



Monday, June 13, 2011

Sadiyo ki Gulami ka Tanaha Deta hai Dushman

सदियों की गुलामी का ताना देता है हरी झंडी वाला पाकिस्तान




लेखक : कमलेश चौहान



आज भी देखती है ख्वाब सुल्तान अलाउदीन और गजनवी की ओलाद

फैला दिया है आतंक पुरे भारत में लेकर देश में पल रहे देशद्रोही नेता का साथ

कश्मीर की घाटियों लुटी है हर भारती माँ बहिन बेटी और बीवी की लाज

फिर भी देश का रक्षक गाये गीत भाई चारे के जिन्दा रखा है अफज़ल व कसाब

देता है होका पाकिस्तान हरा होगा भारत तुमको फिर बनायेगे अपना गुलाम

ओह! देश की रक्षक कहाँ गया वोह ज़ज्बा वोह तुम्हारे देश भक्ति का परचार

दर दर भीख मांगते थे जनता से लेकर सडको पे नेता बनने का सुहाना खवाब



उठे है ज़लज़ले हिंदुस्तान में नेता बने है रावन अपने ही आजाद वतन में

देखकर लगायी जो आग सफल हो गया है दुश्मन नेता आये उसकी चुगल में



रात के अँधेरे में देश के रक्षक ने अजमाया जनता का सबर इस कदर

धर यमराज का घिनोना रूप बनाया रिश्वत को जनम सिद्ध अधिकार



अशक है उन देश वीरो की आँखों में खेली बाज़ी जिन्होंने कश्मीर की सरहंद पे

आज वोह दौर आया मीडिया नेता वार करे अपने ही वतन के देशभकतो पे

हो रहा है स्वतंत्रता का सौदा भरे है अपने हित के लिये विदेशो के गौदाम

भर्ष्टाचार के खिलाफ उठाया मुदा तो काट के रख देंगे उस सचाई की जुबान

सड़क पे पड़ा बीमार तू जा अपने घर तू , किससे अपने मर्ज़ की दवा मांग रहा है?

हिंदुस्तान को दुश्मन के हाथो बेचने वालो से एक रोटी का टुकरा मांग रहा है?



जो कल तुझसे वोटे मांगते थे आये है ले कर बदुके तेरी मौत का ऐलान

न रहा उनका कोई देश न रहा उनका कोई धरम बेच दिया है इमान

जब जब कटा गला हिन्दू का छुपी साध ली नेता और खबर देने वालो ने

किया बदनाम कृषण राम को देकर दोष बसंती रंग को वतन के नेता ने

कला के नाम पे बाज़ार में सीता और भारत माँ वस्त्र उतारे जाते है

जिहाद के नाम पे अपने वतन में भारतीयों के गले कटवाए जाते है

हुवा है जब जब वार आतंक का दुश्मन से दोस्ती का हाथ बढ़ाते है

दहशत फिलाने वालो को छीन कर गरीबो का हक सीके बेचे जाते है



उठ भारती जब देश का नेता ही बचा सका ना अपनी भारत माँ लाज

इन देश के रिश्वतखोरों के खिलाफ मिलकर उठायो एक कठोर आवाज



मेरी हिंदी इतनी संगीन नहीं है फिर हिंदी में जो टाइप हुवा है उसमे अगर त्रुटी हो तो हमें आप क्षमा कर दिजियेंगा , मेरी भावना देखिये मेरी जनमभूमि के लिये



Sadiyo ki Gulami Ka Tanha Deta hai Hari Jhandi Wala - Kamlesh Chauhan

सदियों की गुलामी का ताना  देता है हरी झंडी वाला पाकिस्तान

लेखक : कमलेश चौहान

आज भी देखती है ख्वाब सुल्तान अलाउदीन और  गजनवी की ओलाद 
फैला दिया है आतंक  पुरे भारत में लेकर देश में पल रहे देशद्रोही नेता  का साथ  
कश्मीर की घाटियों लुटी है हर भारती माँ बहिन बेटी और बीवी की लाज
फिर भी  देश का रक्षक गाये गीत भाई चारे के जिन्दा रखा है अफज़ल व  कसाब
देता है होका   पाकिस्तान  हरा होगा भारत तुमको फिर बनायेगे अपना गुलाम 
 ओह! देश की रक्षक कहाँ गया  वोह ज़ज्बा  वोह  तुम्हारे देश भक्ति का परचार
दर दर भीख  मांगते थे जनता से लेकर सडको पे नेता बनने का सुहाना खवाब

उठे है ज़लज़ले हिंदुस्तान में नेता बने है रावन अपने ही आजाद वतन में
देखकर लगायी जो  आग सफल हो गया है दुश्मन नेता आये   उसकी चुगल में

रात के अँधेरे में देश के रक्षक ने अजमाया जनता का सबर इस  कदर
धर यमराज का घिनोना  रूप बनाया रिश्वत को जनम सिद्ध अधिकार

अशक है उन देश वीरो  की आँखों में खेली बाज़ी जिन्होंने कश्मीर की सरहंद पे
आज वोह दौर आया मीडिया नेता वार करे अपने ही वतन के देशभकतो पे
हो रहा है स्वतंत्रता का सौदा भरे  है अपने हित के लिये विदेशो के गौदाम
भर्ष्टाचार के खिलाफ उठाया मुदा तो काट के रख देंगे उस  सचाई  की जुबान
सड़क पे पड़ा बीमार तू जा अपने घर तू , किससे अपने मर्ज़  की दवा मांग रहा है? 
हिंदुस्तान को दुश्मन के हाथो बेचने वालो से  एक  रोटी का टुकरा मांग रहा है?

जो कल तुझसे वोटे मांगते थे  आये  है ले कर बदुके  तेरी मौत का ऐलान 
न रहा उनका कोई देश  न रहा उनका कोई धरम बेच दिया है  इमान
जब जब कटा गला हिन्दू का छुपी साध ली  नेता और खबर देने वालो ने                                        किया बदनाम कृषण राम  को देकर दोष बसंती रंग को वतन के नेता ने 
 कला के नाम पे  बाज़ार में सीता और भारत माँ  वस्त्र उतारे  जाते है
जिहाद के नाम पे अपने  वतन में भारतीयों के गले कटवाए जाते है 
हुवा है जब जब वार आतंक का  दुश्मन   से दोस्ती  का हाथ बढ़ाते है
दहशत फिलाने  वालो को छीन कर गरीबो का हक  सीके बेचे जाते है  

उठ भारती जब  देश का नेता  ही  बचा सका  ना अपनी भारत माँ  लाज
 इन देश के रिश्वतखोरों के खिलाफ मिलकर उठायो एक कठोर आवाज

मेरी हिंदी इतनी संगीन नहीं है फिर हिंदी में जो टाइप हुवा है उसमे अगर त्रुटी हो तो हमें आप क्षमा  कर दिजियेंगा , मेरी भावना देखिये मेरी जनमभूमि  के लिये
All rights reserved@Kamlesh Chauhan ..06/2011















Friday, June 10, 2011

चिंतन मेरे मन का: मैं राहुल बाबा

चिंतन मेरे मन का: मैं राहुल बाबा: "अगर राहुल जी से आज सच बोलने को कहा जाये और वे आंखे बंद करके सच कहने का फैसला करें तो कुछ इस तरह सच सामने आएगा - एक चिंतन कांग्रेसियों का..."

Sunday, June 5, 2011

परावाणी : The Eternal Poetry: हर लाठी जो सत्याग्रह पर चलती,गांधी को लगती है.

परावाणी : The Eternal Poetry: हर लाठी जो सत्याग्रह पर चलती,गांधी को लगती है.: "फिर भी, तुमने हमसे डर कर , हिंसा का कहर उतारा है. =================== इतिहास साक्षी है इसका , सत्ता की लाठी से अक्सर, जागा करता है श..."

Wednesday, April 6, 2011

चाँद फिर निकला: Written By: Kamlesh Chauhan


चाँद फिर निकला


Written By: Kamlesh Chauhan Copyright@ July 9th, 2008



ये चाँद आज फिर निकला है यु सज धज के

मुहबत का जिक्र हो शायद हाथो की लकीरों मे


याद दिलाता है मुझे एक अनजान राही की

याद दिलाता है उन मुहबत भरी बातो की

टूट कर चाहा इक रात दिल ने एक बेगाने को

कबूल कर लिया था उसकी रस भरी बातो को


वोह पास हो कर भी दूर है मुझ से

दूर होकर भी कितने करीब है दिल के


उनको देखने के लिये ये नैन कितने प्यासे थे

उनको देखने की चाह मे हम दूर तक गए थे

डूब जाते है चश्मे नाज़ मे उनका कहना था

जिंदगी कर दी हमारे नाम उनका ये दावा था

आज चाँद फिर निकला बन ठन कर

चांदनी का नूर छलका हो यु ज़मीं पर

याद आयी नाखुदा आज फिर शब्-ए-गम की

मदभरी,मदहोश,रिश्ता-ए-उल्फ़ते,शबे दराज की


नैनो मे खो गए थे नैन कुछ ऐसे उस रात

छु लिया यूँ करीब हो कर खुल गया हर राज़


आज पूरण माशी का चाँद फिर निकला

सवाल करता है आपसे आज दिल मेरा

मेरे चाँद

तोड़ कर खिलोनो की तरह यह दिल

किसके सहारे छोड़ देते हो यह दिल

अगर वायदे निभा नहीं सकते थे तुम

जिंदगी का सफ़र न कर सकते थे तुम

कियों आवाज दी इस मासूम दिल को

कियों कर दस्तक देते हो इस दिल को

मत खेलो इस दिल से मेरे हजूर

मत छीनो मेरी आँखों का नूर

हमारा तो पहला पहला प्यार है

आँखों मे तुम्हारा ही खुमार है

हर रोज तुम्हारा ही इंतजार है

दिन रात दिल रोये जार जार है


या तो हमें सफ़र मे साथ लेलो

या फिर अपनी तरह

हमें भी खुद को भुलाना सीखा दो

जीना सिखा दो मरना सिखा दो

अभी तो ज़िन्दगी एक इल्जाम है

बिन तुम्हारे सुनी दुनिया

हमारा तो संसार ही बेजार है

all rights reserved with Kamlesh Chauhan none of the lines and words are allowed to manipulate and changed. Thanks







Thursday, March 24, 2011

International Conspiracy Target Kashmir India : Written by: Kamlesh Chauhan@2011

International Conspiracy Target Kashmir India

Kamlesh Chauhan

Copyright@2011


“Asi gachchi Pakistan, Batao roas te Batanev san”


I am not a historian or politician. I am as universal citizen who dreams about world peace. When I came in United States of America I missed my mother country India. I was a teenager bride and mother to be made me homesick, However America made me to fell in love as I accepted America my adopted land. I had a dream to make America and India best friend of each other, Support each other and unite each other as two of us the largest democratic countries in the world.

In 1989, Jamate-e Islam wage Jihad for Jammu and Kashmir which international media ignored it. Kashmir Liberation Front and Hizabut Mujahedeen terrorist provoked innocent Muslims youths to flout curfew so youths get killed and human rights righteous army made India the culprit.

There were loud speakers all over the Kashmir making peaceful Hindus to be frightened of their lives as the Slogans were “'Kashmir mei agar rehna hai, Allah-O-Akbar kehna hai” Yehan Kaya Chelga “Nizame Mustafa means Sharia Law” “We want Pakistan along with Hindu women without their men” Human rights and International media failed to report to world citizens along with Indian Elite Media.

Now question arises why international communities wants Kashmir a small state of India, a integral part of India to be divided in small nation while ignoring the Pakistan occupied Kashmir and China occupied Kashmir.

Answer is very simple while innocent citizens of the world are not aware of it. It was painful for British to leave India. British never accepted accede of Kashmir to India. British did excellent job to create Jinnah. United States wants to use Kashmir as a power play to control Asia Sub Continent. People of Kashmir and India need to understand being separate from each other we become puppet of these international communities. India so called elite media is also playing in the hands of international communities. Now Kashmiris are trying to exploit the minds of Kashmiri Hindus to be Kashmiri only but fight against enemy of Kashmir as they consider India the enemy? India Has been Poring their tax payers money from other parts of India while Kashmiri never pay any taxes, offering them resources for education, health and other comforts but still Islam fascists have no problem to take it and still spread hatred among youths in Kashmir. Human rights do not want peace in India. Human rights created to have separate identity with the democratic nations. They are brainwashing the youths and exploiting them.

Now there is another conspiracy is playing on. Leaders from Kashmir come to other states of India, setting the mind set of Indians to bring back Kashmiri Hindus to Kashmir make them as minority so they can make Kashmir as Independent States. All of sudden Pakistan is playing the mind games since Pakistan illegal migrants has settle down in Indian Kashmir for decay , Their generations are almost are very much adults, breed with hatred against India. Human rights make strong accusation against Indian army while ignoring Islamic contributions of the Pakistan ISI. Pakistan occupied Kashmiri have no voice their whole cities are used as weapon Bazaars against India.

United States has to learn and accept India is most peace loving nation in the world. It’s better to make friend with India to have its saying on the Asia –sub continent. To make India self sufficient is favorable to the world. Don’t support separatism in India. India never attacked any nation unless it has been attacked. Indian elite of media better learn to tell the truth than supporting the separatists.

“No Nation Should Be Divided In The Name of Race and Religion” (KChauhan)

“United India will be friend of United States of America” (Kchauhan)







Monday, March 14, 2011

Birth Land : Kamlesh Chauhan all rights reserved 1994

Birth Land


Kamlesh Chauhan@ 1994


Do we have to live in the land we are born? Hinduism especially believes in Karma. Time and Destiny Takes us where we meant to be but no one can forget ones own mother. Reminiscences of ones birth land cause anguish. The flying dust of colorful festivals of our birth land, of our childhood and the youth where we spent most of our time does not go away just because Karma made us to live abroad.

The True Legacy of the birth land could never be less than joy. This magnificent and calm joy of being, serene waves comes from our motherland, it does not lets us lose our way. It creates an eagerness and hope to bring our adopted land and birth land merge with each for better future of our inheritance.

Destiny brought us to abroad to enhance our lives but that does not mean we lose touch with our own civilization. We should not lose the sense of nationalism in our adopted land America, UK and anywhere else in the world. Treachery will lead us towards darkness, evil, hatred and anger. The Feeling of devotion to your birth land is a candle which lightens our way in our adopted land. Nationalism is like a guiding star by its light we shall find a way to our own eternal spirit one has to abolish the feeling of divisiveness... Life needs a guide pole to lead us towards light of unity, sincerity of our mother land.

Oh! Man insolvent is the soul that has forgotten the love of his birth land

The World salute our late poet and writer Noble Laureate Rabinderanath Tagore for his literature “Geetanjali” among “Gora “and play “Red oleanders” and King of Dark Chambers” one of his heart rendering short story’ Kabliwallah” depicts the sentiments of universal humanity. Heart touching lyrics from the film “ Kabliwallah pictured on the veteran actor Balraj Sahni make our soul cry and urge us to be in the land we are born.

“Ae Mere Pyare watan
Ae Mere Bichade Chaman
Tujh pe Dil Qurban”

In This nuclear age where life is pacing fast, one should not forget the one’s roots. In the words of Marcus Garvey: A People without knowledge of their past, history, origin and culture are like a tree without roots” Indian civilization is one of the oldest civilizations in the world. Hindu Dharma is one of the most tolerate, peace loving way of life. Hindu Dharma does not convert people. It does not kill people in the name of religion. If someone is not Hindu we never force Hindu philosophy on them. Its just not Hindu Philosophy way. That is the great beauty of Hindu Dharma. Vedas are the oldest books in the world. The world can learn a lot from Indian culture and ethics but now question arises are we keeping our ethics? To preserve the culture, one has to make an effort to sustain the cultural values, keep the unity among its people. Oldest civilization of India can be maintained by uniting together. People who are committing atrocities in the name of religion spread poison. People who embrace to the separatists are venomous to the humanity. They can be eliminated if we stand against such evil souls. Animosity is so poisonous that it spread so fast that unity of one’s motherland will be susceptible. Universal unity can be achieved by keeping togetherness in the family, in the nation which will lead to the universe.

A mother protect her child while she is carrying the child in her womb and after the birth, she still sustain, nurture her child. It behooves the same child when he or she is an older and when mother in need to fulfill the role of protector, provider for the parents.

In the execution of one patriotic responsibility debate and self criticism is not unwarranted but consensus building and common action for the common goal should be driving force. One has to eliminate negative feelings of religious hatred, but love and harmony of togetherness can be gained by living under one Banner. Will America allow California a nation incases of majority of one religion? Then why would India? Will UK divide Scotland incase there are majority of Sikhs or Hindus or Muslims? They why would India? Will Canada ever make Toronto a state in case there are majority of Sikhs, Hindus or Muslims? They why would India?

If one is not loyal to own motherland, integrity of that human being will be in question. Those who presume too much separatism, to claim divide and rule, they lost the patience and toleration of the real meaning of patriotism and loyalty. Separatism calls slavery. To survive in this modern world, one needs identity as one nation not a religion. That where human rights are making blunder and misguiding the separatist to have identity as a state and religion. Religion is for our personal moral guide. Human rights need to unite the nations.

“Wake up countrymen and women; you are called by your motherland
Awaken yourself, before it is too late; help your birth land, no matter where you go, where you live
Be loyal to your native land”

Monday, February 28, 2011

जैसे कुछ हुआ ही नहीं !! - पंकज त्रिवेदी All rights Reserved with Pankaj Trivedi

जैसे कुछ हुआ ही नहीं !! - पंकज त्रिवेदीby Pankaj Trivedi on Monday, February 28, 2011 at 8:35pm


लोगों की भीड़ को

चीरती हुई तुम्हारी दो आँखे

जब देखती है मुझे तो

लोगों की भीड़ की सभी आँखें

एक ही शख्स पर तरकश से निकले

ज़हरीले तीर की तरह

चुभने लगती है मुझे और
लहूलुहान कर देती हैं मेरी संवेदना को....

और मेरा कलेवर

सहता है चुपचाप हमेशा की तरह !

ऐसा क्यूं होता है कि -
लोगों की नज़रें

तीर की नोंक बन जाती है फिर भी

मैं तुम्हे देखता रहता हूँ,

जैसे कुछ हुआ ही नहीं...!!

Sunday, February 27, 2011

हवाएँ - पंकज त्रिवेदी-- All rights reserved with Pankaj Trivedi

करता हूँ तुम्हें प्यार तो, जलती है यह हवाएं

लोग भी यहाँ क्यूं जलने लगे, लगती है हवाएं

बात मन की है सुनो, जाती है यूं ही दूरतलक

लोग भी कितने अजीब है, कहती यह हवाएं

समझना चाहता था, तुम्हें जिंदगीभर के लिएँ
न पार कर पाया दहलीज़ भी, लगती थी हवाएं

ममनून हूँ तुम्हारा, जो सिसककर सह रही थी

क्या जानो प्यार को तुम भी, लगती हैं जो हवाएं





Thursday, February 24, 2011

Trial Time Written by Kamlesh Chauhan Copyright@2002 Kamlesh Chauhan

TRIAL TIME
Kamlesh Chauhan
Copyright@2002
We should not expect anything from love one in revert
As we say

If there is true love, it will come back to you

But without belief where the relationships

Stay?

Is it asking for legitimacy is too much to ask

Or its self-absorbed thought?

All I wanted Him to be loyal

Is this too much to ask?
All I wanted him to be aware of his neighbors’’

Is this too much to seek?

Until he does not come to benevolent
I will keep my peace
I need to go away under the state of affairs

I heard aloofness and absence make us

Long for each other more

But I find that conflicting

My circumstances made him to hide and trick

Yes! He loved me as long as he could

Until he set up himself enthralled in fallacy
He became trendy in the la la land
He was more in demand

So he decided to be cagey
He became callous and ferocious to my desires

Why would he have to face the world for me?

Why he has to combat for my honor?

While he get attention from the world

His sincerity nebulous and he became more

Loyal to the one who were sham
He set his bond with secretive names

He was delighted by the secretive fames

I found my self in shocked Deposit

His heart became like a gigantic sky

I became Night and he became a day


This Poem is dedicated to those who have to deal with friends who change with in a blink of eyes and no where to found when true friend needs at the time of their trial time.

I wrote this poem when my dearest father who had helped many people in his life while those relatives, no where to found at the time of his Last stage of his Karma. He was lucky to have good family and his children who respected him and try to follow the ethics and moral he had in his life. He loved his country India and had great honor for both India and America. At the last stage of his life he wanted his body should be covered with both Flags India and America. You are always with me Dad. You are my guiding light dad. I love you.



****Nothing should be manipulated and exploited from this poem all rights are reserved with Kamlesh Chauhan.****



Monday, February 21, 2011

वोह निकला चाँद पूरनमाशी का लेखिका : कमलेश चौहान (गौरी )

वोह  निकला  चाँद पूरनमाशी का  

लेखिका : कमलेश  चौहान  (गौरी )

Copyright@2011

खिड़की  में  खड़ी  कुछ यु  ही ताने बाने  बुन रही थी
बार बार गुजरे लम्हों की  परछाईया  तले खोयी थी

वोह समुंदर का किनारा यहाँ हम  साथ साथ चले थे
मुलाकातों के दामन में आँखों में नशा कुछ तबसुम थे

आज कुछ ऐसा आलम है तू नहीं तेरी यादे पुकारती है
गुजर जाती है सुबह हर शाम जुबान तुझे आवाज देती है

दीवारों को तनहाई  में तुम्हारी पुरानी बाते  सुनाती हु 
धुप में देख अपना ही साया कल की  बात कहती हु

                  सुनी मेरे चाँद ! कल रात की बात

आह ! कल निकला गज़ब का असमान में पूरनमाशी का चाँद था
आँखों में छाया तेरे नाम का खुमार, जिस्म में अजीब सा तनाव था

तुम तो कहीं दूर थे , पर तुम क्या जानो  वोह  चाँद धरती के बहूत  करीब था
ख़ामोशी से जुबान कह उठी , उफ़ ! दुनिया बनाने वाले  तेरी कुदरत का कमाल था

फिर उभरा सीने में  भुला बिसरा  दर्द , फिर आयी  वोह पूरनमाशी की रात की याद 
जिस रात तुने  सुनाया  मज़बूरी का साज ,टूट गया हमदोनो का सुहाना  खवाब

चांदनी रातो में यु रो  कर, मुझे  यु झूठी  तसली दे कर,  तुम मुझसे जुदा हो गए थे
अपने दामन से तेरी  आँखों के आंसू पोषती  रही , तुम जब  दूर अन्धेरो में खो गए थे

पूरनमाशी की रात आज भी है , मेरी आँखों में  वोह नमी आज भी है
तू नहीं है मेरे पास तेरी आँखों में छलकते आंसुवो की तस्वीर आज भी है










Tuesday, February 8, 2011

Sunil Malikbhai Sonu ki Contrubuation _ Na Socho Apnae Pran KI

Sunil Malikbhai Sonu February 8 at 1:08pm Report


विश्व एकता के सम्मुख ना सोचो अपने प्राण की।

बात करो अब हमसे केवल मानव के कल्याण की।।


तम को धर से दूर करो अब पट खोलो किवाड़ की।

सीमाओं को खत्म करो अब बात करो ना बाड़ की।।

ना हो विषमता ना हो बन्धन ना हो सीमायें जिसमें।

मिल जुल कर प्रयास करो उस नव युग के निर्माण की।।


बात करो अब हमसे केवल मानव के कल्याण की।।

अब तो त्याग करो श्रंखला विजयों के अभियान की।

ध्वनियां तुम तक भी पहुचेगी मानवता के गान की।।

साथ हमारे अगर तुम्हे भी शान्ति दूत बन पाना है,

बन्द करो अब पूजा तुम भी भाले और कृपाण की।।

बात करो अब हमसे केवल मानव के कल्याण की।।

अहंकार को छोड़ो कुछ ना कीमत है अभिमान की।

हिल मिल कर अब तुम भी सोचो मानव के सम्मान की।।

लालच में तुम फंसे रहोगे ना इसमें कुछ रक्खा है,

कोशिश करके देखो राहें पाओगे निर्वाण की।।

बात करो अब हमसे केवल मानव के कल्याण की।।


नहीं सुनाओ अब तुम गाथा मानव के संहार की।

दिल में ज्योति जलाओ तुम भी प्यार भरे संसार की।।

जब तुमको है ये लगता सब जीवन एक समान है,

फिर क्यों अलग उपाय हो करते अपने जीवन त्राण की।।

बात करो अब हमसे केवल मानव के कल्याण की।
Copyright @ Sunil Malikbhai Sonu

Sunday, February 6, 2011

Contribution of Writer nPoet Satyaprakash Tyagi _ Mai Patali Si Dhar

Satyaprakash Tyagi February 5 at 5:36pm Reply• Report


मैं पतली सी धार नदी की गहराई को क्या पहचानूँ !

मेरे अंतर प्रेम ,ह्रदय के कुटिल भाव को मैं क्या जानूँ !



वैसे कहते लोग कि मैने,

चीर दिया धरती का आँचल ,

मुझ से ही है जीत न पाया ,

कोई गिरिवर या कि हिमांचल ,

अम्बर पर छाये टुकड़ों में

चीर दिए हैं मैने बादल,

हर प्राणी कहते उत्सुक हैं

सुनने को मेरी ध्वनि कल कल

पितृ गृह से जब निकली थी

धवल बनी कितनी ,कितनी थी निर्मल

बढ़ता गया गरल ही मुझसे

माना पछताई में पल पल

आखिर मुझको ले ही डूबा

लगता है जो सागर निश्छल

ह्रदय दग्ध दिखलाऊँ किसको ,किसे पराया अपना मानू !

पथ साथी सब मिले लुटेरे

मान के प्रेमी गले लगाया

दोनों ही हाथों से लूटा

तन मन अन्दर जो भी पाया

सबने मुझको किया लांछित ,

देख जगत को मन भरमाया !

मैने सबके पाप समेटे

जो भी जितना संग ले आया

अस्तित्व मिटाया मैने अपना

तभी सिन्धु ने गौरव पाया

सुनी व्यथा पर दर्द न जाना ,

बोलो कैसे व्यथा बखानूं !!
Copyright@Satyaparkash Tyagi

Thursday, February 3, 2011

Significance of Colors: Contribution of Suresh Sharma

Poem: Significance of Colors


Rainbow is so beautiful to behold,
Presenting a panoramic view manifold.
Colors represent many hues of Life,
Some are light while others are bright.

The white is representative of harmony and peaceful sentiments,
The Red represents its valiant and fighting nature & fire elements.
The Green represents environmental purification and an agent of climate change.
The Blue reflects the purity and transparency in oceanic shades,
And Yellow is a color of Life Vibrancy and merriment trade.


Orange is the color of Blissful spirituality,
Where conscience is reflected in its true reality.
Black is the color of sacrifice and sadness,
Representing the bereavement and darkness.

The Golden is the color of enlightenment,

Full of glory, richness and fulfillment.

Thus our Life is amalgamation of many colorful states,

Some may be bright and some represent dark and sad state.

Let us fill our life with bright colors,

and share our sorrows all together.

Copyright: Suresh Chander Sharma







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Wednesday, February 2, 2011

Rajiv Bhatnagar Special Contribution

Cling to hope, hold it dear to me,


Treasured as a tree hold for rain

And as my heart regards you.

I hold to hope, that believes

...Though the time uncertain,

My eyes will again see who my heart feels.

I hold onto hope, that knows

Even do my dreams hear no place

Within the heart I reach for,

Still where I feel you I have

Some part of your existence.

Until it cannot, hope guides me,

The hope of feeling your heart

Beating close to mine.
Written by : Rajiv Bhatnagar