Sunday, June 26, 2011

Mere Zanib Ek Arz Hai Meri - writer _ Kamlesh Chauhan@2011.All Rights Reserved

मेरी जानिब इक  अर्ज़ है मेरी 
लेखक : कमलेश चौहान ( गौरी)

मैने माना की तेरी मुहब्बत ने  बनाया दर्रिया-ए नापैदाकरा मुझे 
यह पाव में रस्मो रिवाजो की कड़िया दूर जाने को मजबूर  करे मुझे

गर गर्म हवाए सितम की उड़ा के  किसी दूर सागर में फैंक  आये मुझे
आस न  छोड़ देना , भूल न जाना  यु   रास्ते की  भूल समझ कर  मुझे 

पूछ रास्ता अम्बर से  मेरे जानिब मेरे जिगर तुम हमें अपने  पास बुला लेना
हम गिर जाये राह में ठोकर खाकर , दे आसरा अपने कंधो पे हमें उठा लेना
हम रूठ भी जाये  अगर बार बार तुमसे  , तुम प्यार से हमें यु मना लेना
बिखर जाये अगर हमारे खुश्क  उदास गेसू , अपने हाथो से इन्हे संवार देना  
 हो कर बेज़ार इस   दुनिया से तेरे आगे,  रो पड़े बेमतलब  बात बात पे  हम
देकर अपनी मजबूत बाज़ुवो का सहारा , तुम हमें अपने सीने से  लगा लेना
एहसास है दिल को खुबसूरत तो हम  नहीं   , काबिल भी नहीं रहे  हम तेरे 
एक अर्ज़ है बस मेरी इतनी . मेरे यह हसीं खवाब तुम अपनी आँखों में बसा लेना 

Please this is my humble request use your own creativity. Nothing should be manipulated, exploited from this poetry in any forms of sentiments, Views from above Poetry. Copy Right@"Castle In The Sky Upcoming Novel"Kamlesh Chauhan Gauri
 
दर्रिया -ए नापैदाकरा =  अथाह सागर
 


 
 



 

Sunday, June 19, 2011

Bewazah Teri Gali Mein: Lekhak --Kamlesh Chauhan @June 2011


बेवज़ह तेरी गली में


लेखक - कमलेश चौहान

Copy Right@Kamlesh Chauhan


कहाँ से लायू किताबे ज़ीस्त , कौन लिखेंगा तेरा नाम ?

मेरा हाथो की लकीरों में

अंधेरो से गिला काया करू , उदय होते ही उजले सूरज के

दोनों हाथ जल गए थे सवेरे में

दिल की दहलीज़ पर सदियों से जो सुबह की कायनात सी

खामिशी छाई थी

ले जाकर किनारे पे साहिल ने चुपके से सागर में

खुद ही नाव डुबोई थी

चले ले कर रहगुजर में मीठे खवाबो का काफिला

दो अजनबी इक साथ

बिन सोचे, बेख्याल , मदहोश, बेकाबू हिसारो में कैद

मासूम ज़ज्बात

याद आये वोह रविंशे-गर्दोबाद तेज़ हवा के झोंके

मेरे कदम बेवजह तेरी गली में ले गए

न जाने क्या हुवा यह तो है मेरी रूह के पहचाने दरो दिवार

बेखुद नासुबरी आ गए

शौके -बे -माया ने तुझे भी शायद जा नींद से जगाया होगा

सुनी जो शबेतार में कदम की आहट

मेरी आँखों में थी तेरी रोशनी शायद चाँद निकल आया होगा

हलके हलके बदने लगी दिलो की चाहत

तुम्हारी वफ़ा को करू मै सजदे , तकरार पर भी रोकते हो

रोक लेते हो रास्ता मेरा

भीगी पलकों को यु चूम कर मेरी मस्ती में मुस्करा देते हो

चुमते है लब मेरे नाम तेरा

आस दिलाते हो उन पालो की तुम और मै का सरूर होगा

सर्द रातो की लम्बी रातो में खामोश चाँद तारे होंगे


बस कर मेरे दिल की धारको में मेरा राज़ जाने वाले

तुझे हासिल करना

दो जहानों के फासलों में दहकते ज़ज्बातो को जगाने वाले

दिन रात तेरे ख्वाब देखना

मेरे मुकदर में लिखा अदब का लिखा कहर नहीं बदल सकता

जो बिगड़ जाते है नसीबे तखली कंकारो के हाथो

वोह नसीब गुल्बदानो से संवारा नहीं जा सकता

सुन गौर से र्हर्बने शौक यह भरम की खावाबे राह्गुजर है

जिनकी तकदीरो में शिकस्ते मुसाफत

उनका वक़त बदले भी नहीं बदल सकता

बेहतर है इसे इक रात का खोया खवाब समझकर सुबह होते भूल जाना

रहे तेरी दुनिया आबाद यारब , मेरे हर गुनाह को नसीब का भूल समझना

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Monday, June 13, 2011

Sadiyo ki Gulami ka Tanaha Deta hai Dushman

सदियों की गुलामी का ताना देता है हरी झंडी वाला पाकिस्तान




लेखक : कमलेश चौहान



आज भी देखती है ख्वाब सुल्तान अलाउदीन और गजनवी की ओलाद

फैला दिया है आतंक पुरे भारत में लेकर देश में पल रहे देशद्रोही नेता का साथ

कश्मीर की घाटियों लुटी है हर भारती माँ बहिन बेटी और बीवी की लाज

फिर भी देश का रक्षक गाये गीत भाई चारे के जिन्दा रखा है अफज़ल व कसाब

देता है होका पाकिस्तान हरा होगा भारत तुमको फिर बनायेगे अपना गुलाम

ओह! देश की रक्षक कहाँ गया वोह ज़ज्बा वोह तुम्हारे देश भक्ति का परचार

दर दर भीख मांगते थे जनता से लेकर सडको पे नेता बनने का सुहाना खवाब



उठे है ज़लज़ले हिंदुस्तान में नेता बने है रावन अपने ही आजाद वतन में

देखकर लगायी जो आग सफल हो गया है दुश्मन नेता आये उसकी चुगल में



रात के अँधेरे में देश के रक्षक ने अजमाया जनता का सबर इस कदर

धर यमराज का घिनोना रूप बनाया रिश्वत को जनम सिद्ध अधिकार



अशक है उन देश वीरो की आँखों में खेली बाज़ी जिन्होंने कश्मीर की सरहंद पे

आज वोह दौर आया मीडिया नेता वार करे अपने ही वतन के देशभकतो पे

हो रहा है स्वतंत्रता का सौदा भरे है अपने हित के लिये विदेशो के गौदाम

भर्ष्टाचार के खिलाफ उठाया मुदा तो काट के रख देंगे उस सचाई की जुबान

सड़क पे पड़ा बीमार तू जा अपने घर तू , किससे अपने मर्ज़ की दवा मांग रहा है?

हिंदुस्तान को दुश्मन के हाथो बेचने वालो से एक रोटी का टुकरा मांग रहा है?



जो कल तुझसे वोटे मांगते थे आये है ले कर बदुके तेरी मौत का ऐलान

न रहा उनका कोई देश न रहा उनका कोई धरम बेच दिया है इमान

जब जब कटा गला हिन्दू का छुपी साध ली नेता और खबर देने वालो ने

किया बदनाम कृषण राम को देकर दोष बसंती रंग को वतन के नेता ने

कला के नाम पे बाज़ार में सीता और भारत माँ वस्त्र उतारे जाते है

जिहाद के नाम पे अपने वतन में भारतीयों के गले कटवाए जाते है

हुवा है जब जब वार आतंक का दुश्मन से दोस्ती का हाथ बढ़ाते है

दहशत फिलाने वालो को छीन कर गरीबो का हक सीके बेचे जाते है



उठ भारती जब देश का नेता ही बचा सका ना अपनी भारत माँ लाज

इन देश के रिश्वतखोरों के खिलाफ मिलकर उठायो एक कठोर आवाज



मेरी हिंदी इतनी संगीन नहीं है फिर हिंदी में जो टाइप हुवा है उसमे अगर त्रुटी हो तो हमें आप क्षमा कर दिजियेंगा , मेरी भावना देखिये मेरी जनमभूमि के लिये



Sadiyo ki Gulami Ka Tanha Deta hai Hari Jhandi Wala - Kamlesh Chauhan

सदियों की गुलामी का ताना  देता है हरी झंडी वाला पाकिस्तान

लेखक : कमलेश चौहान

आज भी देखती है ख्वाब सुल्तान अलाउदीन और  गजनवी की ओलाद 
फैला दिया है आतंक  पुरे भारत में लेकर देश में पल रहे देशद्रोही नेता  का साथ  
कश्मीर की घाटियों लुटी है हर भारती माँ बहिन बेटी और बीवी की लाज
फिर भी  देश का रक्षक गाये गीत भाई चारे के जिन्दा रखा है अफज़ल व  कसाब
देता है होका   पाकिस्तान  हरा होगा भारत तुमको फिर बनायेगे अपना गुलाम 
 ओह! देश की रक्षक कहाँ गया  वोह ज़ज्बा  वोह  तुम्हारे देश भक्ति का परचार
दर दर भीख  मांगते थे जनता से लेकर सडको पे नेता बनने का सुहाना खवाब

उठे है ज़लज़ले हिंदुस्तान में नेता बने है रावन अपने ही आजाद वतन में
देखकर लगायी जो  आग सफल हो गया है दुश्मन नेता आये   उसकी चुगल में

रात के अँधेरे में देश के रक्षक ने अजमाया जनता का सबर इस  कदर
धर यमराज का घिनोना  रूप बनाया रिश्वत को जनम सिद्ध अधिकार

अशक है उन देश वीरो  की आँखों में खेली बाज़ी जिन्होंने कश्मीर की सरहंद पे
आज वोह दौर आया मीडिया नेता वार करे अपने ही वतन के देशभकतो पे
हो रहा है स्वतंत्रता का सौदा भरे  है अपने हित के लिये विदेशो के गौदाम
भर्ष्टाचार के खिलाफ उठाया मुदा तो काट के रख देंगे उस  सचाई  की जुबान
सड़क पे पड़ा बीमार तू जा अपने घर तू , किससे अपने मर्ज़  की दवा मांग रहा है? 
हिंदुस्तान को दुश्मन के हाथो बेचने वालो से  एक  रोटी का टुकरा मांग रहा है?

जो कल तुझसे वोटे मांगते थे  आये  है ले कर बदुके  तेरी मौत का ऐलान 
न रहा उनका कोई देश  न रहा उनका कोई धरम बेच दिया है  इमान
जब जब कटा गला हिन्दू का छुपी साध ली  नेता और खबर देने वालो ने                                        किया बदनाम कृषण राम  को देकर दोष बसंती रंग को वतन के नेता ने 
 कला के नाम पे  बाज़ार में सीता और भारत माँ  वस्त्र उतारे  जाते है
जिहाद के नाम पे अपने  वतन में भारतीयों के गले कटवाए जाते है 
हुवा है जब जब वार आतंक का  दुश्मन   से दोस्ती  का हाथ बढ़ाते है
दहशत फिलाने  वालो को छीन कर गरीबो का हक  सीके बेचे जाते है  

उठ भारती जब  देश का नेता  ही  बचा सका  ना अपनी भारत माँ  लाज
 इन देश के रिश्वतखोरों के खिलाफ मिलकर उठायो एक कठोर आवाज

मेरी हिंदी इतनी संगीन नहीं है फिर हिंदी में जो टाइप हुवा है उसमे अगर त्रुटी हो तो हमें आप क्षमा  कर दिजियेंगा , मेरी भावना देखिये मेरी जनमभूमि  के लिये
All rights reserved@Kamlesh Chauhan ..06/2011















Friday, June 10, 2011

चिंतन मेरे मन का: मैं राहुल बाबा

चिंतन मेरे मन का: मैं राहुल बाबा: "अगर राहुल जी से आज सच बोलने को कहा जाये और वे आंखे बंद करके सच कहने का फैसला करें तो कुछ इस तरह सच सामने आएगा - एक चिंतन कांग्रेसियों का..."

Sunday, June 5, 2011

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परावाणी : The Eternal Poetry: हर लाठी जो सत्याग्रह पर चलती,गांधी को लगती है.: "फिर भी, तुमने हमसे डर कर , हिंसा का कहर उतारा है. =================== इतिहास साक्षी है इसका , सत्ता की लाठी से अक्सर, जागा करता है श..."