Monday, October 12, 2015

मेरा रोष यह पुजनीय साहित्यकारों को जिन्होंने हिन्दु नाम को कलंकित किया। : लेखिका :कमलेश चौहान (गौरी )

मेरा रोष यह पुजनीय साहित्यकारों को जिन्होंने हिन्दु नाम को कलंकित किया। 

 लेखिका :कमलेश चौहान (गौरी )
लेखक की कलम कभी एक वर्ग के लिये कागज के पनो को काला नही करती।  साहित्य की कलम इंसाफ के डगर पर चलती है।  परन्तु आज शरम से सर झुक गया की हमारे बड़े बड़े साहित्यकारो ने बिना सत्य जाने अपना साहित्य अकदमी का पुरस्कार ऐसे वापिस किया जैसे की मरने वाले ने गाय के बछड़े को  चुराकर मारा नहीं काटा नही।  यह बात मै मानती हुं दोषी को मारने का हक किसी भी इन्सान को नहीं।  किसी को भी कानुन अपने हाथों में   नहीं लेना चाहिये लेकिन हिन्दु को अपने देश में अपने हिन्दु को नफरत की नज़र से देखा  जाता है।  कोई कहता कश्मीर भारत का हिस्सा  नहीं   है , कश्मीर भारत  का है होगा । उसे मालूम नहीं है ? अरे नेता तुम्हे इंजीनियरिंग का सर्टिफिकेट लिया ,  लेकिन काश्यप ऋषि की धरती कश्मीर की पवित्र धरती के बारे नहीं मालूम ? अशोका दी ग्रेट की धरती कश्मीर का नहीं मालुम ? गुरु तेग बहादुर ने अपने हिन्दु जनता लिये क़ुरबानी दी तुम्हे उसका नही  मालुम ? धिक्कार है तुम्हारी ऐसी डिग्री पर। 

कलम को हथियार बनाकर अपने भारत को शर्मनाक करने वाले साहित्यकारो , तुम पुरस्कार के काबिल ही नहीं थे। तुम्हारे देश के जवानों का सर काट कर ले गये आतंकवादी पड़ोसी , तब तुम्हारी कलम टुट गयी थी? क्या तुम्हारी उंगलियों ने १९८४ में सिख भाइयों और बहनों की पुकार सुनी थी दिल्ली में ? जिन्हे दिल्ली के हिन्दु भाइयों ने अपनी जान जोखीम डाल कर अपने सिख भाइयों को बचाया था। कहा गया था जब पड़ोसी के बहकावे में... आकर बसों से निकाल निकाल कर पंजाबी हिन्दु मासूमों को मारा गया था। इसके बावजुद भी सिख और हिन्दू भाई चारा कायम रहा। ओह लेखकों तुम्हारी कलम आज शर्मनाक है जो कश्मीरी हिन्दू औरतों के बलत्कार के किस्से तुम्हारी उंगलिया न लिख सकी। मासूम कश्मीरी हिन्दु के जिसमे के आतंकवादियो ने टुकड़े टुकड़े करके बेहरमी से उनके जिस्म टुकड़े को बेचा गया। जिस रात हिंदू को मारते थे उस रात मृत्यु नाच करते थे आतंकवादी।रोती हैं कश्मीर के धरती तुम गद्दारों की वज़ह से। तुम्हे रोना ना आया बल्कि अपने सैनिकों पर इल्ज़ाम लगाया ?
मुम्बई रेलवे स्टेशन से लेकर गली गली हमारे मासुम हिन्दु बच्चो को बेरहमी से मारा गया तब कहा था पुरस्कार लौटाना । ऐसे साहित्यकार लेखक नही हो सकते। जब बंगला देश में , पाकिस्तान में हिंदू की बेटी की इज़्ज़त लुटी जाती है , तब तुम्हारी कलम टूटू जाती है ? जब हमारा पड़ोसी हमारे कलाकारों को गाली देकर पाकिस्तान से बाहर निकाल देता है , तब कला के नाम पर तुम्हे आतंकवाद देश पाकिस्तान की राजनीति पर ज़ुबान नही खुलती ? आज भी देश तुम जैसे गद्दारो से भरा पड़ा है। हमारे लिखने पर हमें भारत से दुर रहने उल्हामा देते है। बी जे पी के नेता है या कांग्रेस या है गद्दार केजु पार्टी तुम सब शिव सेना को गाली देते हो , सैफरन पर इल्ज़ाम लगाते हो। आइने में जाकर अपना चेहरा देखो , आईना बता देंगा तुम और हम स्वार्थी है। जम्मू के हिन्दू के साथ बी जे पी , कांग्रेस और अब नया गद्दार धोखा कर रहे है। हमारे खून में गद्दारी कहा से आई है ? हमारी कलम में गद्दारी कहा से आयी? दुशमन तुम पर हज़ार साल गुलामी का थप्पड़ मारता है ,फिर भी हमें होश क्यों नहीं आता। (गौरी)

2 comments:

  1. W/o log kya likhengey jinko rajnitik prashraya Samman dilata hai.

    ReplyDelete
  2. W/o log kya likhengey jinko rajnitik prashraya Samman dilata hai.

    ReplyDelete