Wednesday, November 4, 2015

घायल अपने मथुरा काशी ,घायल जमुना गंगा है:मनोज"मोजू"

घायल अपने मथुरा काशी ,घायल जमुना गंगा है
घायल अक्षरधाम हमारा घायल पड़ा तिरंगा है

घायल दिखता भारत माँ का उज्ज्वल सा वो भाल भी है
घायल दिखते पर्वत घाटी ,घायल नदिया ताल भी है
घायल केसर वाली घाटी , बौना है कानून जहा
भारत माँ के बेटो का ही बिखरा मिलता खून वहा
घायल अपनी मर्यादा और चोटिल संस्कार हुआ
लगता सूरज की किरणों पे जुगनू का अधिकार हुआ
उनकी तो गाली भी होती अभिव्यक्ति की आज़ादी
और हमारे भजनो पे भी रोक यहा पे लगवा दी
जनक के जैसे चीखे आती किले की प्राचीरों से
संशय मे पूछे क्या भूमि रिक्त हो गयी वीरो से
अपनी कायरता के कारण देखो ये क्या हाल हुआ
छलनी भारत माँ का आँचल घायल माँ का भाल हुआ
गीता रामायण पढ़ने की बात पे होता दंगा है .........
घायल अपने ......

घायल हुई है रामायण भी चिंतित दिखते राम अभी
दुश्मन के बाणो से खतरे मे लक्ष्मण के प्राण अभी
क्या रावण मनमाने ढंग से वेश बदल कर आयेगा
सीता जैसे भारत की बेटी को हर ले जाएगा
और कहा तक सहते रहना होगा अब उसके छल को
याद करो हे बजरंगी तुम भी अपने अतुलित बल को
चाहे कितने शीश हो दुश्मन के काटो अब गर्दन को
याद करो गोपाला के उस काली नाग के मर्दन को
हमको ज्ञान न देना कोई हम गीता के वाचक है
इस धारती के राजा हम है बाकी के सब याचक है
उनको खुश करने की खातिर ,खुद को चुप न कर लेंगे
धर्म की रक्षा खातिर अब हम नरसिंह रूप भी धर लेंगे
भीम रूप धर फाड़नी हमको दुर्योधन की जंघा है ..........घायल अपने ....

मनोज"मोजू"

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