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नयी पीढ़ी , नयी फसल ,, नयी हड्डिया और पुराणी हड्डिया : Lekhika Gauri

नयी पीढ़ी , नयी फसल ,, नयी हड्डिया और पुराणी हड्डिया KAMLESH CHAUHAN·THURSDAY, DECEMBER 21, 201716 Reads Gauri कभी वह ज़माना था जब हमारे कम पड़े लिखे माँ बाप। नाना सा नानी सा , फुफा फुफी। मासी सा मौसा सा यह सिखाया करते थे बड़ो से कैसे बात करते है। गलती न होने पर भी किसी बात पे ज़िद करने पर माफ़ी मांगने पर विवश किया करते थे। लेकिन यह कैसा जमाना है ? हार्दिक पटेल, कन्हैया कुमार, अल्पेश ठाकोर और जिगनेश मवानी जैसी औलाद को किसने जनम दिया ? कौन देता है इनको पैसा ? कहा से आये है यह लोग जो अपनी मातृभूमि को भी बेच रहे है ? कौन है इन लोगो के पीछे ? कौन पैसा खिला रहा है इनको ? यह कैसा पालन पोषण है या फिर उनकी संगत कैसी है जिनके अपनी ज़ुबान से शब्द निकालते वक़त उनकी बुद्धि घास चरने चली जाती है कि उनके घर में भी उनके पिता की हड्डियां सेकने के लिये कहा भेजा जाये ? युवायो की ज़ुबान ख़राब की जा रही है और कितनी बदतमीज़ी है कितनी नीचता है इन इन लोगो में की बड़ो को गाली दे कर कहते है मैं तो गाली दूँगा ? कितने निर्लज है यह दो दो टके के मोल पर बिकने वाले, कल के पैदा हुवे शोकरे। ई…