Monday, February 28, 2011

जैसे कुछ हुआ ही नहीं !! - पंकज त्रिवेदी All rights Reserved with Pankaj Trivedi

जैसे कुछ हुआ ही नहीं !! - पंकज त्रिवेदीby Pankaj Trivedi on Monday, February 28, 2011 at 8:35pm


लोगों की भीड़ को

चीरती हुई तुम्हारी दो आँखे

जब देखती है मुझे तो

लोगों की भीड़ की सभी आँखें

एक ही शख्स पर तरकश से निकले

ज़हरीले तीर की तरह

चुभने लगती है मुझे और
लहूलुहान कर देती हैं मेरी संवेदना को....

और मेरा कलेवर

सहता है चुपचाप हमेशा की तरह !

ऐसा क्यूं होता है कि -
लोगों की नज़रें

तीर की नोंक बन जाती है फिर भी

मैं तुम्हे देखता रहता हूँ,

जैसे कुछ हुआ ही नहीं...!!

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