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मेरा रोष यह पुजनीय साहित्यकारों को जिन्होंने हिन्दु नाम को कलंकित किया। : लेखिका :कमलेश चौहान (गौरी )

मेरा रोष यह पुजनीय साहित्यकारों को जिन्होंने हिन्दु नाम को कलंकित किया।   लेखिका :कमलेश चौहान (गौरी ) लेखक की कलम कभी एक वर्ग के लिये कागज के पनो को काला नही करती।  साहित्य की कलम इंसाफ के डगर पर चलती है।  परन्तु आज शरम से सर झुक गया की हमारे बड़े बड़े साहित्यकारो ने बिना सत्य जाने अपना साहित्य अकदमी का पुरस्कार ऐसे वापिस किया जैसे की मरने वाले ने गाय के बछड़े को  चुराकर मारा नहीं काटा नही।  यह बात मै मानती हुं दोषी को मारने का हक किसी भी इन्सान को नहीं।  किसी को भी कानुन अपने हाथों में   नहीं लेना चाहिये लेकिन हिन्दु को अपने देश में अपने हिन्दु को नफरत की नज़र से देखा  जाता है।  कोई कहता कश्मीर भारत का हिस्सा  नहीं   है , कश्मीर भारत  का है होगा । उसे मालूम नहीं है ? अरे नेता तुम्हे इंजीनियरिंग का सर्टिफिकेट लिया ,  लेकिन काश्यप ऋषि की धरती कश्मीर की पवित्र धरती के बारे नहीं मालूम ? अशोका दी ग्रेट की धरती कश्मीर का नहीं मालुम ? गुरु तेग बह...

हिन्दी कार्य: मानसिक नक़्शा --- परीक्षा

हिन्दी कार्य: मानसिक नक़्शा --- परीक्षा : MIND MAP परीक्षा 1. दीवानी पद की परीक्षा   2. उम्मीदवार आए, जिन्होंने अपने चरित्र को झूठे रुप में बढ़ा - चढ़ा कर दिखाने की कोशिश की। 3.  पद ...

बेवज़ह तेरी गली में : Copy right @Kamlesh Chauhan ( Gauri)लेखिका : कमलेश चौहान (गौरी)

बेवज़ह  तेरी गली में Copy right @Kamlesh Chauhan ( Gauri) लेखिका : कमलेश चौहान (गौरी) कहाँ से लायू किताबे ज़ीस्त , कौन लिखेंगा तेरा नाम ? मेरे   हाथो की लकीरों में अंधेरो से गिला क्या  करू , उदय होते ही   उजले सूरज से  दोनों हाथ जल गए थे सवेरे में दिल की दहलीज़ पर सदियों से जो सुबह की कायनात सी ख़ामोशी  छाई थी ले जाकर किनारे पर  साहिल ने चुपके से सागर में खुद ही नाव डुबोई थी चले ले कर रहगुजर में मीठे  खवाबो का काफिला दो अजनबी इक  साथ बिन सोचे, बेख्याल , मदहोश, बेकाबू  हिसा रो में कैद मासूम ज़ज्बात याद आये  वोह  रविंशे-गर्दोबाद तेज़ हवा के झोंके मेरे कदम बेवजह तेरी गली में ले गए न जाने क्या हुवा यह तो है मेरी  रूह के पहचाने दरो दिवार बेखुद नासुबरी आ गए शौके -बे -माया ने तुझे भी  शायद  जा नींद से जगाया होगा सुनी जो  शबेतार में कदम की आहट मेरी आँखों में थी तेरी रोशनी शायद चाँद...

Fir Tiranga Muskrata hai . Written by : Poet Jeffrey Partap

हटा नज़रे रूकसार ऐ यार से के तुम्हे अब वतन बुलाता है देश पे मरणो वालो का नाम किताबो में लिखा जाता है खुशनसीब हो तुम देश के गर काम आ जाओ शहीदों की मज़ारों पे फिर तिरंगा भी मुस्करता ह Jeffrey Partap ै

" The daughter of India " or Shall The daughter of the world Documentary

" The daughter of India " or Shall The daughter of the world  Documentary :Written by Kamlesh Chauhan ( Gauri)   Rape is Universal Issue no doubt about it  . Every Nation has that problem .  Even developed nation like "U.S., Sweden, France, Canada, UK and Germany are the most immersed  in this crime." I am  glad at least in India people protest and India is also exposing such rapists .  When we look at the bigger picture  of crime against women , We cant undermine the crime in many part of Ethiopia.  What about Sri Lanka ?  Funny thing is rape was not crime in France until 1980.  Now come down to Germany " Germany is on the number six in the highest rape crime with the figures of 6,507.394 , Which is really big figure"   United Kingdom is not behind in  violence and rape against women." in January 2013, the Ministry of Justice , Office for the National Statics  and Home office released its first ever joint...

ओह! शहीदो की जलती चिता को भुलने वालो :लेखिका : कमलेश चौहान (गौरी )

ओह! शहीदो की जलती चिता को भुलने  वालो   लेखिका : कमलेश चौहान (गौरी ) Copyright@Kamlesh Chauhan(Gauri) लगी यु गहरी चोट जिगर पर जब जब मेरा प्यारा वतन ज़ख़्मी हुआ।  किसी ने किये टुकड़े वतन के किसी ने राम का नाम बदनाम किया।   ओह! शहीदो की जलती चिता को भुलने वालो देश के नादानों  सीमा पर गोली झेलने वालो की कुर्बानी का भी कभी सोचा  तुमने।   कौमो ,मज़हबों पर बाँट दिया देश  हर गली में फैला दी अराज़कता  पहन ईमानदारी का फरेबी लिबास, चुपचाप  रहा  दुश्मनो को पालता।    माँ के पेट को काटने वालो  ,सुनो गौर से ताज़ को  निर्लज तोड़ने वालो    पंजाब भारत माँ का पेट कश्मीर है ताज हिमालय की और तकने वालो।   इतनी जल्द भुल गये ?गोरी ,गजनवी के ज़ुलम सोमनाथ के चीख़ती आवाजें  तलवार की नोक पर धर्म को बदला हिंदुकुश में बहती माँ की मासुम औलादे   लुटी...
दिल्ली तेरी यह आदत बहुत पुरानी है। लेखिका : कमलेश चौहान (गौरी ) सदियों से चली आयी है दिल्ली की एक रीत हुई दिल्ली  भंग दुश्मनों के संग  की तूने प्रीत ।    तुम्हारी खोट बनी बल फिर से  दुश्मन की तलवार लो शुरू हो गया भारत माता के सम्मान पर  वार ।  आज की बात नही दिल्ली तेरी यह आदत सदियों पुरानी है  कल भी की थी बर्बादी  तुने आज भी देश की तबाही ठानी है।    सुना  है तेरे राज्य में आज भी आई है  गद्दारो की बहार  मिलकर जो देश के टुकड़े  टुकड़े करने को  हुई तैयार । तु तो अपनी हो कर बनी दुश्मन तो अब गैरो से क्या गिला वाह!मेरी दिल्ली दहशत गर्दो से तुम्हे इनाम अब झाडु मिला। Copyright@Kamlesh Chauhan(Gauri)